उत्तराखंड विधानसभा सत्र में केंद्र सरकार का जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) संशोधन अधिनियम-2024 पारित हो गया। इस अधिनियम के तहत जल प्रदूषण को रोकने के लिए नए प्रावधान लागू किए गए हैं। इसके अंतर्गत विभिन्न इकाइयों को जल निस्तारण के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) से अनुमति प्राप्त करनी होगी।

इस नए कानून के तहत जल प्रदूषण करने वाले व्यक्तियों या इकाइयों पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, एक निर्णायक अधिकारी की नियुक्ति का प्रावधान भी किया गया है, जो इस जुर्माने को लागू करेगा। अब तक राज्य में जल प्रदूषण के मामलों की निगरानी और कार्रवाई पीसीबी के माध्यम से की जाती थी, लेकिन अब इसे और सख्त किया जाएगा।

इस अधिनियम के लागू होने के बाद, दोषी इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पीसीबी को नमूने लेने और सक्षम न्यायालय में वाद दायर करने की शक्ति भी दी गई है। इसके अलावा, पहले के कानून में कारावास की व्यवस्था थी, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है। पहले जल प्रदूषण के मामलों में तीन महीने तक की सजा और 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता था, लेकिन अब केवल जुर्माना ही लगाया जाएगा।

निर्णायक अधिकारी नियुक्त हाेंगे, केंद्र करेगा नियुक्ति

इसके अलावा गैर अपराधीकरण के तहत निर्णायक अधिकारी को नियुक्त किए जाने का प्रावधान किया गया। यह अधिकारी किसी मामले में 10 हजार रुपये से 15 लाख तक का जुर्माना आरोपित कर सकेंगे। आगे उल्लंघन की दशा में प्रतिदिन 10 हजार रुपये अतिरिक्त दंड आरोपित किया जा सकेगा। निर्णायक अधिकारी सचिव स्तर से नीचे के नहीं होंगे। इनको केंद्र सरकार के माध्यम से नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा अभी तक पीसीबी अध्यक्ष को चयनित करने के तरीकों के निर्धारण के संबंध में शक्तियां राज्य के पास थीं, जो अब केंद्र में निहित की गई हैं।

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